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Sunday, 14 January 2018

बचपन

बहुत याद आती है आज ,
बचपन का हर एक अंदाज ,
नहीं किसी से कोइ परदा ,
नहीं किसी से कोइ राज ।

खो जाना बस खेल मगन हो ,
अद्भुत था बचपन का साज ,
कभी झगड.ता था आपस में,
फिर भी है उस दिन पे नाज ।

दोपहर की भरी धूप में ,
अरमानोँ को दे परवाज ,
दौड. भाग जाना वो घर से ,
माँ देती रहती आवाज ।

यौवन कुचल गया बचपन को ,
चुरा गया खुशियोँ का राज ,
आवाजाही बनी जिँदगी ,
गिरा गई खुशियोँ पे गाज ।

याद करुं जब भी बचपन को ,
आँखे भर आती है आज ,
छोड. जवानी फिर से हमको ,
पहना दे बचपन का ताज ।

Thursday, 30 July 2015

'सारथी' पर सितम पर सितम हो गये

सारे  सपने यही पर ख़तम हो गये
जबसे वो ग़ैर के प्रियतम हो गये

किस्सा - ए - इश्क़ की अब तो सुनते कहीं
मुस्कराते रहे आँख नम हो गये

 ज़िन्दगी जीने की जो तमन्नाये थी
अब तो जाने लगे क्यों ये कम हो गये

वो जो आये तो थे रौशनी दे गये
उनके जाने से क्यों आज तम हो गये

वो निधि जो चुराकर कोई ले गया
'सारथी' पर सितम पर सितम हो गये


हँसते - हँसते हमें अलविदा कह गये

वो हमारे हर इक हक़ अदा कर गये
अपने दिल से भी हमको जुदा कर गये

हो सके वो हमें भूल जाये मग़र
उनकी यादें हमें गुदगुदा कर गये

उनको आंसू हमारे दिखे भी नही
हँसते - हँसते हमें अलविदा कह गये

दिल लगाया किसी से किसी के हुये
दो दिलो को तो वो ग़मज़दा कर गये

ज़िन्दगी की निधि हो समर्पित उन्हें
'सारथी' को ख़ुदा से जुदा कर गये