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Thursday, 30 July 2015

'सारथी' पर सितम पर सितम हो गये

सारे  सपने यही पर ख़तम हो गये
जबसे वो ग़ैर के प्रियतम हो गये

किस्सा - ए - इश्क़ की अब तो सुनते कहीं
मुस्कराते रहे आँख नम हो गये

 ज़िन्दगी जीने की जो तमन्नाये थी
अब तो जाने लगे क्यों ये कम हो गये

वो जो आये तो थे रौशनी दे गये
उनके जाने से क्यों आज तम हो गये

वो निधि जो चुराकर कोई ले गया
'सारथी' पर सितम पर सितम हो गये


Sunday, 9 November 2014

इक दिवाली ये भी है

रौशनी बजते पटाखें, इक दिवाली ये भी है 
दिल में फिर भी उदासी, इक दिवाली ये भी है 

जिंदगी की दौड़ में और जीतने की होड़ में
हो गयी घर से ही दूरी, इक दिवाली ये भी है 

जगमगाते दीप भी हैं चकचकाती रौशनी 
फिर भी है दिल में अंधेरा, इक दिवाली ये भी है 

हर तरफ बजते पटाखे मुस्कराते लब लिये 
फिर भी ये कैसी उदासी, इक दिवाली ये भी है 

देख मिट्टी के घरोंदे, याद घर की आ गयी 
अपनों की यादों सहारे, इक दिवाली ये भी है