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Tuesday, 16 December 2014

सारथी ये भी फ़लसफ़ा तो नहीं

दिल किसी बात पर खफ़ा तो नहीं
कैसे कह दूँ , मैं बेवफ़ा तो नहीं

वो मेरे पास ही तो है, फिर भी
वक़्त की मार ये जफ़ा तो नहीं

भूल जायेंगे हम उन्हें भरसक
यह वफ़ा भी कोई, वफ़ा तो नहीं

इश्क़ में है ही क्यूँ यकीं इतना
इश्क़ से है कोई नफ़ा तो नहीं

इश्क़ तो इश्क़ है कभी ना करें
'सारथी' ये भी फ़लसफ़ा तो नहीं  

Sunday, 9 November 2014

इक दिवाली ये भी है

रौशनी बजते पटाखें, इक दिवाली ये भी है 
दिल में फिर भी उदासी, इक दिवाली ये भी है 

जिंदगी की दौड़ में और जीतने की होड़ में
हो गयी घर से ही दूरी, इक दिवाली ये भी है 

जगमगाते दीप भी हैं चकचकाती रौशनी 
फिर भी है दिल में अंधेरा, इक दिवाली ये भी है 

हर तरफ बजते पटाखे मुस्कराते लब लिये 
फिर भी ये कैसी उदासी, इक दिवाली ये भी है 

देख मिट्टी के घरोंदे, याद घर की आ गयी 
अपनों की यादों सहारे, इक दिवाली ये भी है