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Thursday, 17 November 2011

मेरा शहर

हैं लोग हर तरह के कहते मेरे शहर में
बदन लौह है दिल मोम रखते मेरे शहर में

हर ओर हरियाली , खुशहाली संग में
सब मिलके बस्तियां बनाते मेरे शहर में

हर कौम से अलग मजहब है हमारा
हैं पाठ प्यार का पढ़ाते मेरे शहर में

हर एक छत के नीचे बस मिलते आदमी
है इन्सान सभी रहते मेरे शहर में

हर एक के लिए है हर एक सारथी
है मिलके बोझ उठाते मेरे शहर में